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कृष्ण वाणी भाग – 5,अमृत वचन,Krishna Vani,Success Mantra

हर पल मुस्कुराओ बड़ी खास है जिंदगी, क्या सुख क्या दुख बड़ी आस है जिंदगी, ना शिकायत करो ना कभी उदास हो जिंदा दिल से जीने का एहसास है जिंदगी।

अनुभव कहता है खामोशियां ही बेहतर है, शब्दों से लोग बहुत रूठते हैं। जिंदगी गुजर गई सबको खुश करने में जो खुश हुए वो अपने नहीं थे, जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए।

कितना भी समेट लो हाथों से फिसलता जरूर है, ये वक्त है साहब बदलता जरूर है।

यकीन करना सीखो शक तो सारी दुनिया करती है जिंदगी जब देती है तो एहसान नहीं करती और जब लेती है तो लिहाज नहीं करती।

समय ना लगाओ तय करने में कि आपको क्या करना है वरना समय तय कर लेगा कि आपका क्या करना है।

जीवन ऐसा हो जो संबंधों की कदर करें और संबंध ऐसे हो जो याद करने पर मजबूर कर दें।

दुनिया के रैन बसेरे में पता नहीं कितने दिन रहना है, जीत लो सब के दिलों को बस यही जीवन का गहना है।

स्वर्ग में सब कुछ है लेकिन मौत नहीं है, गीता में सब कुछ है लेकिन झूठ नहीं है, दुनिया में सब कुछ है लेकिन सुकून नहीं है और आज के इंसान में सब कुछ है लेकिन सब्र नहीं है।

किसी ने क्या खूब कहा है ना खुशी खरीद पाता हूं ना ही गम बेच पाता हूं और फिर भी ना जाने क्यों हर रोज कमाने जाता हूं।

सुबह की चाय और बड़ों की राय समय-समय पर लेते रहना चाहिए

पानी के बिना नदी बेकार है, अतिथि के बिना आंगन बेकार है, प्रेम ना हो तो सगे संबंधी बेकार हैं, पैसा ना हो तो पॉकेट बेकार है और जीवन में गुरु ना हो तो जीवन बेकार है इसलिए जीवन में गुरु जरूरी है गुरुर नहीं।

एक बार इंसान ने कोयल से कहा तू काली ना होती तो कितनी अच्छी होती, सागर से कहा तेरा पानी खारा ना होता तो कितना अच्छा होता, गुलाब से कहा तुझ में कांटे ना होते तो कितना अच्छा होता तो तीनों एक साथ बोले इंसान अगर तुझ में दूसरों की कमियां देखने की आदत ना होती तो तू भी कितना अच्छा होता।

श्री कृष्ण कहते हैं मोह समाप्त होते ही खोने का डर भी निकल जाता है चाहे धन हो,वस्तु हो या प्रेम हो, फिर चाहे संबंध हो या जीवन। ‌

जो आपको मना करदे उसे जिंदगी भर एहसास होना चाहिए कि उसने क्या खो दिया है।

शिक्षा कहीं से भी प्राप्त की जा सकती है लेकिन संस्कार हमेशा घर से ही मिलते हैं।

जिस प्रकार उबलते हुए पानी में कभी परछाई नहीं दिखती ठीक उसी प्रकार परेशान मन में समाधान नहीं दिखते।

लोग चाहते हैं कि आप बेहतर करें लेकिन ये भी तो सत्य है कि वह कभी नहीं चाहते कि आप उनसे बेहतर करें।

आप और तुम में बहुत फर्क होता है ‘आप’ के सामने दुःख बयान नहीं किया जा सकता परंतु ‘तुम’ के सामने दिल खोल कर रख सकते हैं।

नियत कितनी भी अच्छी हो दुनिया आपको आपके दिखावे से जानती है और दिखावा कितना भी अच्छा हो ऊपरवाला आपको नियत से जानता है।

श्री कृष्ण कहते हैं अगर आप उन बातों और परिस्थितियों की वजह से चिंतित हो जाते हैं जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी एवं भविष्य का पछतावा है।

बीते कल का अफसोस और आने वाले कल की चिंता, ऐसे चोर हैं जो हमारे जीवन की खूबसूरती चुरा लेते हैं।

चिंता करोगे तो भटक जाओगे और चिंतन करोगे तो भटके हुए को रास्ता दिखाओगे।

सबको गिला है कि बहुत कम मिला है जरा सोचिए जितना आपको मिला है उतना कितनों को मिला है।

क्यूं चिंता करते हो कि लोग तुम्हें नहीं समझते, चिंता तो तुम्हें तब करनी चाहिए जब तुम स्वयं को नहीं समझते।

लोग क्या सोचेंगे इस बात की चिंता करने की वजाय क्यों ना कुछ ऐसा करने में समय लगाया जाए जिसे प्राप्त करने पर लोग आपकी प्रशंसा करे।

किसी को कभी दुख मत देना क्योंकि दी हुई चीज एक दिन हजार गुनी होकर लौटती है।

मूर्ख लोगों से कभी बहस नहीं करनी चाहिए, वो पहले आपको अपने स्तर पर ले जाएंगे और फिर अपने अनुभव से आप को हरा देंगे।

पानी की तरह बनो जो अपना रास्ता स्वयं बनाता है, पत्थर की तरह नहीं जो दूसरों का रास्ता भी रोक लेता है।

अपनी बातों को सदैव ध्यानपूर्वक कहें क्योंकि हम तो कह कर भूल जाते हैं लेकिन लोग उसे याद रखते हैं।

लोग दूसरों की बुराई करने में जो वक्त लगाते हैं उस वक्त में खुद को बेहतर बनाने में काम करें तो दुनिया बदलते देर नहीं लगती।

अंधे को मंदिर में देखकर लोग हंसकर बोले मंदिर में दर्शन के लिए आए हो पर क्या भगवान को देख पाओगे, अंधे ने मुस्कुराकर कहा कि क्या फर्क पड़ता है कि मैं भगवान को नहीं देख पाऊंगा, मेरा भगवान तो मुझे देख लेगा। दृष्टि नहीं दृष्टिकोण सही होना चाहिए।

श्री कृष्ण कहते हैं जो मानव अपनी निंदा सुन लेता है वह सारे जगह पर विजय प्राप्त कर लेता है।

सोच अच्छी रखो लोग अपने आप अच्छे लगेंगे, नियत अच्छी रखो काम अपने आप ठीक होने लगेंगे।

जो लोग दूसरों को बर्बाद करने की सोचते हैं वे अपने मकसद में इस हद तक अंधे हो जाते हैं कि वे खुद कब बर्बाद हो गए इसका उनको कोई पता तक नहीं चलता।

भगवत गीता में लिखा है इंसान उतना ही बड़ा बन सकता है जितना बड़ा वह सोच सकता है। ‌

इंसान की समझ सिर्फ इतनी है कि उसे जानवर कहो तो नाराज हो जाता है और शेर कहो तो खुश हो जाता है।

ईश्वर के प्रेम में रोने का जो आनंद है वो संसार में हंसने में भी नहीं है।

श्री कृष्ण कहते हैं बूंद सा जीवन है इंसान का लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है।

औरों के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा तो जमाना दुश्मन बन गया।

ढूंढो तो सुकून खुद में है दूसरों में तो बस उलझनें ही मिलेंगी।

गलतियां ढूंढना गलत नहीं है बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए।

इज्जत हमेशा इज्जतदार लोग ही करते हैं लेकिन जिनके पास खुद इज्जत नहीं है वो किसी दूसरे की क्या इज्जत करेंगे।

अपनी कमियों पर भी रखो नजर, हर बार गलती दूसरों की नहीं होती।

श्री कृष्ण कहते हैं भय मनुष्य के जीवन का चालक है, मनुष्य भय का कारण ढूंढ ही लेता है। जीवन में हम जिन रास्तों का चुनाव करते हैं उनका कारण भय है लेकिन यह वास्तविक बल्कि काल्पनिक होता है

समय का स्वामी ईश्वर होता है ना कि हमारे मित्र व शत्रु, यदि कोई हमें हानि पहुंचाने की कोशिश करता है तो वह हमें कोई भी हानि नहीं पहुंचा सकता।

विचार जल की तरह है आप उसमें गंदगी मिला दो तो वह नाला बन जाएगा, अगर उसमें सुगंध मिला दो तो वह गंगाजल बन जाएगा।

एक महात्मा ने पूछा कि सबसे ज्यादा बोझ कौन सा जीव उठाकर घूमता है, किसी ने कहा गधा तो किसी ने बैल, सभी ने अलग-अलग प्राणियों के नाम बताएं लेकिन महात्मा किसी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और महात्मा ने हंसकर कहा गधे, बैल और ऊंट के ऊपर एक मंजिल तक बोझ रखकर उतार देते हैं लेकिन इंसान मरते दम तक विचारों का बोझ लेकर जीता है।

सफलता जिस ताले में बंद होती है वह दो चाबीयों से खुलता है एक कठिन परिश्रम से और दूसरा दृढ़ संकल्प से।

समय के साथ बदल जाना बहुत आवश्यक है क्योंकि समय बदलना सिखाता है रुकना नहीं।

श्री कृष्ण कहते हैं कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है।

अगर इंसान सुख-दुख की चिंता से भी ऊपर उठ जाए तो आसमान की ऊंचाई भी उसके पैरों तले आ जाए।

चिंता एक काली दीवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है जिसमें से निकलने की कोई भी गली नहीं सूझती।

हर इंसान में कोई ना कोई प्रतिभा जरूर होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरो के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं।

यदि कोई तुम्हें नजरअंदाज कर दे तो बुरा मत मानना क्योंकि लोग अक्सर अपनी हैसियत से बाहर की चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं।

जीवन में कभी किसी से अपनी तुलना मत करना क्योंकि आप जैसे हैं सर्वश्रेष्ठ हैं, ईश्वर की प्रत्येक रचना सर्वोत्तम है।

अगर आपको कुछ लोग पसंद नहीं करते तो परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि हर एक की पसंद बढ़िया नहीं हो सकती।

आलस्य जीवित मनुष्य की कब्र है इसे त्याग देना ही उचित है।

मित्रों मैं आशा करता हूं यह POST आपको पसंद आई होगी, धन्यवाद!

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